पिंपरी चिंचवड पोलिस कमिश्नर पर क्यू हुई कंटेंप्ट पिटीशन दाखल | ⚖️ क़ानून के बीच फँसा एक सामाजिक कार्यकर्ता,


⚖️ क़ानून के बीच फँसा एक सामाजिक कार्यकर्ता

🏛️ न्यायपालिका, कार्यपालिका और सच की लड़ाई


✍️ प्रस्तावना

लोकतंत्र में सामाजिक कार्यकर्ता जनता की आवाज़ होता है।
अन्याय, बेकानूनी काम और सत्ता के दुरुपयोग पर सवाल उठाना उसका फ़र्ज़ होता है।

लेकिन भारत की सच्चाई यह है कि ❗
जो सवाल करता है, वही सबसे पहले निशाने पर आता है
और कई बार सामाजिक कार्यकर्ता
👉 न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच फँस जाता है

यह ब्लॉग एक सच्ची घटना पर आधारित है —
जो सिस्टम की हकीकत और सच की लड़ाई को सामने लाता है।


🚩 मामला कैसे शुरू हुआ : सवाल पूछने की हिम्मत

📅 4 सितंबर 2023
📍 पुणे महानगरपालिका, शिवाजीनगर

यहाँ एक घेराव आंदोलन हुआ, जिसमें

  • 🧑‍⚖️ विधायक
  • 🏴 राजनीतिक कार्यकर्ता
  • 🧩 विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी

मौजूद थे।

आरोप है कि इस आंदोलन में:
❌ भड़काऊ भाषण दिए गए
❌ आपत्तिजनक बयान हुए
❌ कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश हुई

इसी पर नवयुग निर्माण समिति के संस्थापक अध्यक्ष
आलमगीर युसुफ कुरैशी ने सवाल उठाया:

“अगर कानून सबके लिए बराबर है,
तो फिर इन लोगों पर कार्रवाई क्यों नहीं?”

यहीं से पूरा खेल शुरू हुआ… 🎭


📜 कानून का रास्ता : शिकायत और उम्मीद

📅 14 सितंबर 2023 को
👉 CID (गुन्हे अन्वेषण विभाग) को लिखित शिकायत दी गई।

शिकायत के मुख्य बिंदु:
⚠️ सार्वजनिक शांति को खतरा
⚠️ सामाजिक सौहार्द बिगड़ना
⚠️ देश की एकता और अखंडता पर असर

👉 इसी आधार पर UAPA के तहत कार्रवाई की मांग की गई।

एक सामाजिक कार्यकर्ता की उम्मीद बस इतनी होती है —
✔️ निष्पक्ष जांच
✔️ कानून के अनुसार कार्रवाई


😟 पहली आशंका : कहीं हम पर ही केस न डाल दें

📅 26 जनवरी 2024
शिवाजीनगर पुलिस स्टेशन में मीडिया से बात करते हुए कहा गया:

🗣️ “सत्ता के खिलाफ आवाज़ उठाने का मतलब
खुद पर झूठे केस बुलाना होता है।”

यह डर बेवजह नहीं था,
क्योंकि भारत में अक्सर
👉 शिकायतकर्ता ही आरोपी बना दिया जाता है


📝 निगड़ी पुलिस स्टेशन में बयान : एक अहम मोड़

📅 23 फरवरी 2024
📍 निगड़ी पुलिस स्टेशन

CID द्वारा वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के सामने
👉 आधिकारिक बयान दर्ज किया गया

यह बयान इसलिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि:
📌 सरकारी रिकॉर्ड है
📌 किसी भी केस से पहले दर्ज हुआ
📌 सच की लिखित गवाही है


🚨 डर सच निकला : झूठे केस दर्ज

📅 9 मार्च 2024

बयान के कुछ ही दिनों बाद
👉 सामाजिक कार्यकर्ताओं पर 3 झूठे केस दर्ज कर दिए गए

ये केस थे:
❌ बदले की भावना से
❌ दबाव बनाने के लिए
❌ सच को दबाने के मकसद से

यहीं से सामाजिक कार्यकर्ता
👉 कार्यपालिका के शिकंजे में फँस जाता है 🪤


📨 पुलिस आयुक्त से न्याय की गुहार

📅 26 मार्च 2024

पिंपरी-चिंचवड पुलिस आयुक्त को लिखित आवेदन दिया गया।

मांग साफ थी:
📂 हमारे खिलाफ 3 केस
📂 सामने वालों के 3 केस
📂 कुल 6 केस

👉 सभी मामलों को एक साथ क्लब करके निष्पक्ष जांच की जाए।

पर नतीजा?
❌ कोई जवाब नहीं
❌ कोई जांच नहीं
❌ सिर्फ सन्नाटा


⚖️ न्यायपालिका का हस्तक्षेप : उम्मीद की किरण

जब हर दरवाज़ा बंद लगा,
तब न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया गया

📅 9 जून 2025
🏛️ माननीय बॉम्बे हाईकोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया:

⚖️ “सभी छह मामलों को एक साथ लेकर
चार सप्ताह के भीतर जांच की जाए।”

यह आदेश था
👉 न्यायपालिका पर भरोसे की जीत 🌟


❌ कोर्ट का आदेश, लेकिन ज़मीन पर शून्य

हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद:
🚫 जांच शुरू नहीं हुई
🚫 कोई कार्रवाई नहीं
🚫 तीन-तीन बार याद दिलाने पर भी अनदेखी

❓ सवाल साफ है:

अगर हाईकोर्ट का आदेश भी नहीं माना जाता,
तो आम नागरिक जाए तो जाए कहाँ?


⚠️ Contempt of Court : आख़िरी विकल्प

📅 23 दिसंबर 2025

आख़िरकार
👉 पिंपरी-चिंचवड पुलिस आयुक्त के खिलाफ
Contempt of Court याचिका दाखिल की गई

🏛️ माननीय हाईकोर्ट ने
👉 नोटिस जारी की

यह कदम बदले के लिए नहीं,
👉 संविधान और अदालत की गरिमा बचाने के लिए उठाया गया।


🧠 निष्कर्ष : सामाजिक कार्यकर्ता कहाँ फँसता है?

यह कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं है।
यह हर उस इंसान की कहानी है जो सवाल पूछता है।

सामाजिक कार्यकर्ता फँसता है क्योंकि:
✔️ वह सच बोलता है
✔️ सत्ता से सवाल करता है
✔️ संविधान पर भरोसा करता है

और सिस्टम?
⚠️ कार्यपालिका अक्सर राजनीतिक दबाव में काम करती है
⚠️ अदालत के आदेश तक को नज़रअंदाज़ किया जाता है


⚖️ अगर कोर्ट का आदेश मानना भी ज़रूरी नहीं,
👉 तो फिर कानून किसके लिए है?

🤔 और सामाजिक कार्यकर्ता क्या करे —
✊ अन्याय के खिलाफ खड़ा रहे
या 🤐 चुपचाप बैठ जाए?

यह ब्लॉग सवाल पूछता है।
अब जवाब देना व्यवस्था की ज़िम्मेदारी है


✍️ लेखक : एक सामाजिक कार्यकर्ता


इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

पिंपरी चिंचवडमधील धार्मिक स्थळांवर नोटीसांचा मारा —केवळ धर्मस्थळेच बेकायदेशीर? 🏗️❌🕌

⚖️ एक लढा – शांततेसाठी! 🔱

रामगिरी महाराज के खिलाफ अबाबील इमेल तकरार मुहीम